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Tuesday, December 30, 2008

दान से पुण्य के नाम पर



भगवान का नाम रटता जा ,
पाप पे पाप तू करता जा ,
मन्दिर की घंटी बजादे बस
फिर चैन से रात भर सोता जा ।

क्या हम अन्दर से चोर नही
भगवान् को धोखा देते है
दान से पुण्य के नाम पर
पापों को धोया करते है ।
बुजुर्ग
है क्या , उसकी इज्ज़त क्या
अरमान का कत्ल तो रोज़ करते है
चंद कागज़ के तुकरे ये क्या
इन्ही पे जिंदा रहते है ।
अफ़सोस नही दुःख दर्द है क्या
बिन बात पे रोया करते है
समझ नही जीवन है क्या
पर मरने से हम डरते है ।
गरीब है क्या उसकी भूख है क्या
इन सब से अनजान हम बनते है
रूह तो कबकी मार दी मगर
इंसान भी अधूरे लगते है ।
दान से पुण्य के नाम पर
पापों को धोया करते है ।

Monday, December 29, 2008

जिसकी हम सब रचना है - राशि चतुर्वेदी



राहें अनजान हो ,
मंझर सुनसान हो ,
खौफ के पसीने से
कुछ सहमे और परेशान हो ।

जब टूटे सब ख्वाब हो
अपने नाराज़ हो
हमदम ना पास हो
तन्हाई का साथ हो ।

सोच लेना उस पल तुम
जिसने तुम्हे बनाया है
जिसकी तुम रचना हो
जिसने ये जहाँ बसाया है ।

दिखता नही आँखों से वो
मज़बूत बहुत वो साया है
आता नही सामने मगर
तुम्हारे अन्दर घर बसाया है ।

साँसों को साँस बनाया है
आँखों को जहाँ दिखाया है
दिल में एहसास को समाया है
इंसान को इंसान बनाया है
मांगो उसे जो चाहे तुम ,
बस देता ही देता आया है ।

मौसम बदल जाते है
अपने पलट जाते है
वक़्त को पकड़ पाया है कौन
चेहरे के रंग बदल जाते है ।

समझ सके तू समझ ले आज
बस एक ही वोह अजूबा है
जिसको तुमने पूजा है
जिसकी हमसब रचना हैं
जिसने हमें बनाया है ।

जिस्म तोह एक जरिया है
मकसद उस तक पोहोंचना है
ज़रिये से कर प्यार तू मत
आगे तुझे तोह बढ़ना है ।

महिमा का एक जाल है ये ,
चीर के इसे निकलना है ।
उसमे जाकर मिलना है
जिसने तुझे बनाया है
जिसकी हम सब रचना है ,
जिसने ये जहाँ बसाया है ।
जिसकी हम सब रचना है ,
जिसने ये जहाँ बसाया है ।

Wednesday, December 24, 2008

तुम्हारे चले जाने का अंजाम


दिल के तार आज बेसाज़ क्यूँ है
पलक पे सजे ख्वाब तार तार क्यूँ है
क्या ये है तुम्हारे चले जाने का अंजाम,
आज से ये शख्स कुछ गुमनाम क्यूँ है।
आँखों
से आंसू गिरने को तैयार क्यूँ है,
लबों पे मायूसी का इश्तिहार क्यूँ है ,
क्या ये भी है तुम्हारे चले जाने का अंजाम,
उठते कदम रुकते रुकते से क्यूँ है।

ऐतबार का रुतबा चूर चूर क्यूँ है,
खुशियों को ओढे ये कफ़न क्यूँ है,
क्या ये भी है तुम्हारे चले जाने का अंजाम,
हर पल अब मौत का इंतज़ार क्यूँ है ।

Monday, December 22, 2008

WHEN I WAS FIVE

Those were the days when I was five
Holding my mom’s hand with a free mind.
Take me where ever ; I have full faith in you,
Not much do I know about this world,
You will teach me how to live life.


Those were the days when I was five.
Daddy is strong I am so small.
I love your car, jeans and your bike.
Take me again for a long long drive.
Those were the days when I was five.

O Lord oh God ; have mercy on your child
Now my life has become like a bee hive
My life has lost its charm , to live I strive.
I beg you to take me back into those golden days,
When I was a free bird, chirping all day,
When I was protected well by my parents shadow,
Take me right there, Oh Lord, when I was , only, five !!

Tuesday, December 9, 2008

उसी एक चाँद के नीचे



क्यों वक़्त ने ऐसा वक़्त है दिखाया,
कैसे जिए अकेले , अब तेरा ये साया,
हासिल थी हर खुशी , जिंदगी में मेरे,
खुश किस्मती से जबसे तुमको था पाया ।


हो आज नही तुम पास मगर,
लगता है अभी आ गये अगर,
खिल खिल दिल ये नाचेगा,
आसान लगेगी फिर ये डगर ।

दिल तोह अब भी तेरी मुहब्बत ही सींचे,
तू है कुछ कदम आगे, और मैं कुछ पीछे,
ढूँढ ही लूंगी तुझे एक दिन , ये वादा है मेरा,
है तो हम दोनों आख़िर , उसी , एक चाँद के नीचे।