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Friday, January 2, 2009

चलो फिर एक साल और बीता


आंखों में नमी
लबो पे मुस्कान
खुश हों या मायूस
अजब है दास्तान ।
एक और रात आई
एक और दिन बीता
झूमते हो खुशी में
चलो फिर एक साल और बीता

करीब मंजिल के आगये हो
वक़्त जीकर भी गवां गए हो
काफ़ी है खोया कुछ तोह है जीता
चलो फिर एक साल और बीता

क्या है नया क्या पुराना
गौर फरमाकर मैंने ये देखा
वही है राम वही तो है सीता
चलो फिर एक साल और बीता ।
आगया मैं करीब खुदा और तेरे
जिंदगी ढलने को है , वक़्त कम अब पास मेरे
जाम पे जाम फिर भी मैं पीता
चलो फिर एक साल और बीता