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Wednesday, May 14, 2008

एक काम अभी भी बाकी है




सब ख्वाब तोअब पूरे हुए,
सब क़र्ज़ भी अब चुकते हुए,
ले चलो मुझे अब जहाँ भी तुम,
आज से हम तुम दोस्त हुए।


ऐ दोस्त मुझे कुछ याद आया,
तू चल आगे, मैं पीछे आया,
एक काम अभी भी बाकी है,
पूरा करके बस यूं आया।


काम वो अब पूरा हुआ,
चल दोस्त , मैं संग तेरे हुआ,
ना लौट के वापस देखूंगा,
मेरा तुझसे वादा ये हुआ।


पर शक्ल किसी की आंखो में,
घूमती है हर पल मेरे,
एक झलक मैं लेकर आता हूँ,
आखिरी बार मिल आता हूँ।


कह दो मेरे उस दोस्त से तुम,
क्यों मुझको लेने आया है,
जीवन अभी प्यारा मुझे,
क्यों मौत का साया लाया है।


मोह ना कर दुनिया से तू,
ये तो सब कुछ बस धोखा है,
सच है खड़ा सामने तेरे ,
जिसको तूने रोका है।


आ लग जा गले , चल संग मेरे,
फिर देख तमाशा ऊपर से ,
क्यों मरने से डरता है,
कितने बहाने करता है।

जिस पल सच को जान लिया,
सब कुछ ख़ुद त्यागेगा तू,
मौत तो राह अनंत की है,
मरकर ही तो जानेगा तू।।


एक साथ तुम्हारा पाने को



मैं छोड़ के सारे बन्धन को,
और तोड़ के सारी कसमों को,
दिल हाथ में लेकर आई थी ,
एक साथ तुम्हारा पाने को।


ना ये देखा , ना वो सोचा,
ना इसकी सुनी, ना उससे कहा,
मैं सब कुछ भूल के आई थी,
एक साथ तुम्हारा पाने को।


बाबुल की पुकार है कानों में,
मेरी माँ की आंहे साँसों में,
सब रिश्ते तोड़ के आई थी,
एक साथ तुम्हारा पाने को।


मैं भी आंखों का तारा थी,
चहकती और खिलखिलाती सी,
नन्ही कली थी आँगन की,
जड़ों को ज़ख्मी छोड़ के आई थी,
एक साथ तुम्हारा पाने को।


तुम छोड़ ना देना साथ मेरा,
हाथ में हो बस हाथ तेरा,
अब दुआ यही दिन रात करूँ,
साथ जियूँ और साथ मरूँ।

मर के फिर जी जाउंगी,
एक साथ तुम्हारा पाने को,
हर जनम मैं वापस आउंगी,
एक साथ तुम्हारा पाने को।

जिंदगी इम्तिहान लेती है


जिंदगी इम्तिहान लेती है,
खुशी के लम्हों में गम की परछाई छोड़ देती है,
जिंदगी इम्तिहान लेती है।


मिलन के बाद एक लम्बी जुदाई,
काटे ना कटे, ये मीलो तन्हाई,
पल पल दिल को एक एहसास देती है,
जिंदगी इम्तिहान लेती है।


वादे ना करो इतने ,
आस्मान में तारे है जितने,
हिम्मत जुटा लो तमाम,
के आंसू अभी बाकी है बेशुमार,
होसलों के तार तार छीन लेती है,
जिंदगी इम्तिहान लेती है।

Monday, May 12, 2008

वो काम अब भी अधूरा...

वक़्त के हाथो मजबूर था मै,

कुछ काम थे अधूरे

मसरूफ था मै ।

जिंदगी बीत गई मेरी

वक़्त हो चला पूरा ।

सवाल रह गए कितने

वो काम अब भी अधूरा।

I know it was You


Yes I know it was you
No matter how much you deny
Yes I know it was you
You bring back my smile whenever I cry.

You bring me out from dark to light
You give me sunshine warm and bright
Could not be mere coincidence each time
I know its you, and yes, I am right.

Reasons Unknown


Where is she
Who was in love with me ?
I need her now
In my life to be.

Where did she go,
Who took her away,
Is she fine , happy and gay ?

And that friend close
Also left me alone
Why me again, my flesh and bone ?

Puzzle of life still the same
Playing our roles in the game
Wish to die for name and fame
Reasons unknown; oh what a shame.

Could there be , a story untold
Could there be , a reason to unfold
I wish to know the unknown story
But not in dead and not in cold.

Friday, May 9, 2008

Hopes Remain...

Seasons change, so do we.
Hopes remain, so should be.

Birds in the sky, fly very high
I look at them, with a heavy sigh.

Why not wings He gave to me,
So that I could fly, also very high.

God is wise and very kind.
He gave me power to think and dream.
To hope and want ; desire for more.
With the help of these, I started flying,
And reached the sky, very high.
Where even those birds
Could not be seen.